विश्वास , आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास
विश्वास ,यकीन, भरोशा या कहे उम्मीद जो एक व्यक्ति किसी और व्यक्ति से रखते हैं ! विश्वास का अर्थ है की एक व्यक्ति मानसिक या भौतिक रूप से किसी और से अपेक्षा करता है ! या सीधे सब्दो में कहे तो हम किसी से कुछ अपेक्षा रखते हों या हम पर किसी से अपेक्षा हों उसे बनाये रखना ही विश्वास है !
एक मनुष्य का अध्यन करे तो आपको मिलेगा की वह उम्र दर उम्र विश्वास से दूर होता जाता है , एक छोटे से बच्चे के व्यवहार को ध्यान दें तो देखने में आता है की वह निश्वार्थ भाव से अपने आसपास के लोगो पर पूरी तरह विश्वास रखता है ! जो बोल रहे है , जो कर रहे हैं वह पूरी तरह सही है और उसका अनुकरण करने लगता है , और वह पूरी तरह समर्पित रहता है! पर दुर्भाग्य वश हमें बचपन से ही अविश्वास करना सिखाया जाता है , कुछ प्रचलित मान्यताएं जैसे - ये अच्छा है ये बुरा है ,ऐसा करना सही है ऐसा करना गलत है ,ऐसा इन्सान सही है ऐसा गलत है आदि इत्यादी वह अपने अन्दर समाहित करने लगता है ! और अपनी सरलता और मासूमियत खोना चालू कर देता है और वह बच्चा इन मान्यतायों के आदर पर ही स्वीकारता है , यदि दूसरा व्यक्ति इन मान्यतायों पर खरा नहीं उतरता तो वह असहज महसूस करता है और धीरे -धीरे दूसरों पर विश्वास को भी खोना चालू कर देता है !
विश्वास को लेकर कुछ बातें और सामने आती है की हर वयक्ति अपने आसपास से सम्मान और विश्वास चाहता है मैं अपने आप को जैसा समझता हूँ अपेक्षा करता हु की लोग भी मुझे वही समझे जो मुझे समझते है उनसे मै सहज महसूस करता हूँ और जो नहीं समझते उनसे असहज ! यह तो जाहिर है की विश्वास और सम्मान की अपेक्षा बनी रहती है पर यह भी अनदेखी नहीं की जा सकती की की वयक्ति विश्वास और सम्मान की अपेक्षा तो करता है पर वह उस योग्य नहीं होता है ! विश्वास तथा सम्मान का अनुभव जिस व्यक्ति के साथ नजर आता है वह शारीरिक रूप से सुन्दर न होने पर भी सुन्दर नजर आने लगता है , और इसका ठीक उलटा भी शारीरिक रूप से सुन्दर व्यक्ति में भी कुरूपता नज़र आने लगाती है ! विश्वास कर पाने की योग्यता ही एक व्यक्ति की सुन्दरता है और यही उसे अभय प्रदान भी करती है !
आत्मविश्वास
आत्मविश्वास अर्थात प्रयत्न के साथ स्वयं के ऊपर विश्वास यह एक मानसिक तथा आध्यात्मिक शक्ति है जो महान कार्यों को सरलता से सम्पादित कर देती है !
मनुष्य में संभानाओं की असीम स्त्रोत है , हम अपनी योग्यताओं का अनुमान स्वयं लगा सकते है , की हम क्या कर सकते है ! यह आत्मविश्वास से ही संभव है और यह परिश्रम से ही मिलता है ! आत्मविश्वास किसी भी परिस्थिति में उचित निर्णय लेने में साहस प्रदान करती है, यही एक मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र होता है जो कभी भी मनुष्य को हारने नहीं देता ! संसार में जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं , यदि हम उनका इतिहास पड़ेंगे तो उन सब में एक ही समानता मिलेगी वह है उनका आत्मविश्वास ! आत्मविश्वास स्वयं के अन्दर छिपी एक "ब्लैकहोल" की तरह है जो स्वयं नहीं जनता की वह क्या कर सकता है , चाहे तो वह एक नै सृष्टि का सृजन कर सकता है और चाहे तो विनाश भी कर सकता है ! आत्मविश्वास आग की तरह है जिसे जलने के लिए आग की ही आवश्कता होती है जो नियंत्रित तरीके से जले तो जहाँ को रोशन भी कर सकती है और अनियंत्रित हों जाये तो जला भी सकती है ! अब सवाल यह है की आत्मविश्वास को हासिल कैसे किया जाये और नियंत्रित कैसे रखा जाये -
अति आत्मविश्वास मनुष्य में संभानाओं की असीम स्त्रोत है , हम अपनी योग्यताओं का अनुमान स्वयं लगा सकते है , की हम क्या कर सकते है ! यह आत्मविश्वास से ही संभव है और यह परिश्रम से ही मिलता है ! आत्मविश्वास किसी भी परिस्थिति में उचित निर्णय लेने में साहस प्रदान करती है, यही एक मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र होता है जो कभी भी मनुष्य को हारने नहीं देता ! संसार में जितने भी सफल व्यक्ति हुए हैं , यदि हम उनका इतिहास पड़ेंगे तो उन सब में एक ही समानता मिलेगी वह है उनका आत्मविश्वास ! आत्मविश्वास स्वयं के अन्दर छिपी एक "ब्लैकहोल" की तरह है जो स्वयं नहीं जनता की वह क्या कर सकता है , चाहे तो वह एक नै सृष्टि का सृजन कर सकता है और चाहे तो विनाश भी कर सकता है ! आत्मविश्वास आग की तरह है जिसे जलने के लिए आग की ही आवश्कता होती है जो नियंत्रित तरीके से जले तो जहाँ को रोशन भी कर सकती है और अनियंत्रित हों जाये तो जला भी सकती है ! अब सवाल यह है की आत्मविश्वास को हासिल कैसे किया जाये और नियंत्रित कैसे रखा जाये -
- जिस तरह आग को जलने के लिए आग की आवश्यकता होती है , उसी प्रकार आत्मविश्वास के लिए आत्मविश्वासी लोगो की आवश्यकता होती है !
- हमारे विचार ही है जो लोगों को अच्छा या बुरा बनाते हैं ,अतः लोगों पर विश्वास करना सीखें , विश्वास ही आत्मविश्वास की जड़ है ! जिसे हम सकारात्मक सोच कहते हैं !
- डर (किसी भी सब्दकोश में कोई परिभाषा ही नहीं है) ही एक ऐसा कारक है जो आत्मविश्वास का हनन करता है ! अतः निर्भय होना सीखें !
- अनुशासन आत्मविश्वास का एक प्रमुख कारक है , जैसे ही आप अपने आप को अनुशासित कर लेते है आत्मविश्वास स्वतः ही आ जाती है !
- जैसा की आत्मविश्वास एक अध्यात्मिक भी है , अतः ध्यान भी एक माध्यम है जिससे शरीर में उर्जा एवं विश्वास भरता है !
अति आत्मविश्वास, आत्मविश्वास का ही रूप है , आत्मविश्वास का उत्पादन जब अधिक होने लगता है तो वह अति आत्मविश्वास का रूप ले लेता है ! आत्मविश्वास जहाँ सफलता के लिए परिश्रम करता है वही अति आत्मविश्वास परिणाम को जानते हुए उसके अनुरूप परिश्रम नहीं करना है ! दोनों में सिर्फ परिश्रम का ही अंतर है , अति आत्मविश्वास से बचने के लिए परिश्रम करते रहना चाहिए !
यह लेख पड़कर बहुत अच्छा लगा और अपने आप को आत्म्वासी महसूस कर रहा हूँ ! धन्यवाद् !
ReplyDeletenice article..
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