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कश्मकश

बड़ी कश्मकश में है जिंदगी ,सांस लेना भी मुश्किल है और थामना भी। जब भी असफ़ल होता हुँ कुछ न कुछ छूट जाता है , अपने तो कब के बिखर गये बस उम्मीद है की कभी टूटती नहीं। मैं अस्थिर हुँ , क्युंकि मैं परवाह करता हुँ , पर शायद पानी की तरह अस्थिरता में ही झीलों और पोखरों की तरह सुंदरता है। पानी की मंज़िल स्थिरता नहीं है वह लगातार बाधाओं को दूर करते बहती रहती है , कभी -कभी वह खुद ही बहते -बहते बाधा बना लेती है ,पर अपनी प्रकृती नहीं छोड़ती। बिना रुके लगातार करोड़ों की प्यास बुझाती जाती है ,और स्थिरता कुछ लोगों की, स्थिरता आवश्यक है ,पर बिचारों में न की प्रकृति या मंजिल में.………………
खुद से मुलाकात  कशुर ना उस फैसले का था , ना इस फैसले का है . शुरुर तो इन पैरों का है , जो कभी थमना ही नहीं जानते . एक वक़्त था जो गुजर  गया , जब गलियों में कंचे खेला करते थे . एक वक़्त है जो वजूद की तलाश में गुजर जायेगा . आज भी देखता हु उस सख्श को आइने में  जो संभालता हुआ गिरता  हुआ नज़र आता है . किसी ने कहा था ,कोयला भी तप कर हीरा बन जाता है , आज भी जल - जल कर जी रहा हूँ ,हीरे की तलाश में . कब कोई ख्वाब पूरा हो तो , एक गहरी साँस लेता . पर कही वो मेरी आखरी सांसे ही ना हो . पर जिंदगी यही ख़तम नहीं होती , और उम्मीद कभी कम नहीं होती . कहते है जिंदगी बहुत छोटी है , और दुनिया बड़ी लम्बी . कभी किसी मोड़ पर  खुद से मुलाकात तो होगी ...

India Against Corruption

अभी -अभी एक पैगाम आया है , देश-भक्ती का गुमान छाया है । लोग अब जग रहे हैं , दिल्ली की तरफ भाग रहें हैं । अब तक देश वासियों को क्या हो रहा था , दो दिन पहले हर कोई सो रहा था । कैसी चली ये भ्रष्टाचार की आंधी, अन्ना हजारे को बना दिया दूसरा गाँधी । अब भ्रष्टाचार ईतना बढ गया है , लगता है पाप का घड़ा भर गया है । आज खोखली हो गयी जीवन की परिभाषा , कहा है उम्मीद और कैसी ये आशा । हर इन्सान यहाँ पथभ्रष्ट है , और कहता है राष्ट्रभ्रष्ट है । हमने ही भ्रष्टाचार को बढावा दिया है , न जाने कितनों को चढ़ावा दिया है । थोडा साहस जुटते तो ये नौबत नहीं आती, और न ही सांसद में सरकार सोती । आज राष्ट्र को ईमानदारी और सच्चाई की रोशनी चाहिए , और हमारी कोशिस भी यही होनी चाहिए । जय हिंद ............. वन्दे मातरम .........                                               ...

राजा की सोच

एक राजा था। वह बेहद न्यायप्रिय, दयालु और विनम्र था। उसके तीन बेटे थे। जब राजा बूढ़ा हुआ तो उसने किसी एक बेटे को राजगद्दी सौंपने का निर्णय किया। इसके लिए उसने तीनों की परीक्षा लेनी चाही। उसने तीनों राजकुमारों को अपने पास बुलाया और कहा, 'मैं आप तीनों को एक छोटा सा काम सौंप रहा हूं। उम्मीद करता हूं कि आप सभी इस काम को अपने सर्वश्रेष्ठ तरीके से करने की कोशिश करेंगे।' राजा के कहने पर राजकुमारों ने हाथ जोड़कर कहा, 'पिताजी, आप आदेश दीजिए। हम अपनी ओर से कार्य को सर्वश्रेष्ठ तरीके से करने का भरपूर प्रयास करेंगे।' राजा ने प्रसन्न होकर उन तीनों को कुछ स्वर्ण मुद्राएं दीं और कहा कि इन मुद्राओं से कोई ऐसी चीज खरीद कर लाओ जिससे कि पूरा कमरा भर जाए और वह वस्तु काम में आने वाली भी हो। यह सुनकर तीनों राजकुमार स्वर्ण मुद्राएं लेकर अलग-अलग दिशाओं में चल पड़े। बड़ा राजकुमार बड़ी देर तक माथापच्ची करता रहा। उसने सोचा कि इसके लिए रूई उपयुक्त रहेगी। उसने उन स्वर्ण मुद्राओं से काफी सारी रूई खरीद कर कमरे में भर दी और सोचा कि इससे कमरा भी भर गया और रूई बाद में रजाई भरने के काम आ जाएगी। मंझले रा...

विश्वास , आत्मविश्वास और अति आत्मविश्वास

विश्वास  विश्वास ,यकीन, भरोशा या कहे उम्मीद जो एक व्यक्ति  किसी और व्यक्ति से रखते हैं ! विश्वास का अर्थ है की एक व्यक्ति मानसिक या भौतिक रूप से किसी और से अपेक्षा करता है ! या सीधे सब्दो में कहे तो हम किसी से कुछ अपेक्षा रखते हों या हम पर किसी से अपेक्षा हों उसे बनाये रखना ही विश्वास है ! एक मनुष्य का अध्यन करे तो आपको मिलेगा की वह उम्र दर उम्र विश्वास से दूर होता जाता है , एक छोटे से बच्चे के व्यवहार को ध्यान दें तो देखने में आता है की वह निश्वार्थ भाव से अपने आसपास के लोगो पर पूरी तरह विश्वास रखता है ! जो बोल रहे है , जो कर रहे हैं वह पूरी तरह सही है और उसका अनुकरण करने लगता है , और वह पूरी तरह समर्पित रहता है! पर दुर्भाग्य वश हमें बचपन से ही अविश्वास करना सिखाया जाता है , कुछ प्रचलित मान्यताएं जैसे - ये अच्छा है ये बुरा है ,ऐसा करना सही है ऐसा करना गलत है ,ऐसा इन्सान सही है ऐसा गलत है आदि इत्यादी वह अपने अन्दर समाहित करने लगता है ! और अपनी सरलता और मासूमियत खोना चालू कर देता है और वह बच्चा इन मान्यतायों के आदर पर ही स्वीकारता है , यदि दूसरा ...

अपने भीतर

धूप की शरारत के बावजूद जैसे धरती बचाकर रखती है थोड़ी-सी नमी अपने भीतर पहाड़ बचाकर रखते हैं कोई हरा कोना अपने वक्ष में तालाब बचाकर रखता है कोई एक बूँद अपनी हथेली में पेड़ बचाकर रखते हैं टहनियों और पत्तों के लिए जीवन रस फूल बचाकर रखते हैं खुशबू अपने आवरण में चिड़िया बचाकर रखती है मौसम से जूझने की जिजीविषा वैसे ही मैंने बचाकर रखा है अपने भीतर तुम्हारे होने का अहसास।